Stubborn Child | अगर आपका बच्चा है जिद्दी, तो इन उपायों से आप ला सकते हैं उसमें बढ़िया परिवर्तन | Navabharat (नवभारत)

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(प्रतीकात्मक तस्वीर)

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सीमा कुमारी

नवभारत डिजिटल टीम: यूं तो बच्चों का जिद्दी (Stubborn) होना बहुत आम बात हैं। लेकिन, उनका हद से ज्यादा और बात-बात पर जिद करना गलत हैं। यदि आपका बच्चा जिद्दी है, तो आप इसमें अकेली नहीं हैं, कई ऐसे बच्चे हैं जो जरूरत से ज्यादा चिड़चिड़े और जिद्दी होते हैं। अक्सर मां-बाप जिद्दी बच्चे की हरकतों को लेकर काफी परेशान हो जाते हैं और उनके साथ शक्ति बरतना शुरू कर देते हैं। बच्चों को डांटना, मारना, फटकारना यह सब अपनी जगह है। ऐसा करने से बच्चे बेहतर होने की जगह और ज्यादा प्रभावित होते हैं।

हालांकि, जिद्दी बच्चों को डील करना इतना भी मुश्किल नहीं है। आपको केवल कुछ बातों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ऐसा करने से आपको समय के साथ अपने बच्चे में सुधार देखने को मिल सकता हैं। ऐसे में आइए जानें इन विशेष बातों के बारे में।

चाइल्ड एक्सपर्ट्स के अनुसार, जिद्दी बच्चे हमेशा बहस का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं। इसलिए, उन्हें वह अवसर न दें। बच्चे को जो कुछ भी कहना है उसे सुनें और उसे तर्क के बजाय बातचीत में बदल दें। जब उन्हें यह दिखता है कि आप उनके पक्ष को सुनने के लिए तैयार हैं, तो बच्चे भी आपकी बात को सुनते और समझते हैं। हमेशा बच्चों को यह एहसास करवाना जरूरी है कि वे आपसे हर तरह की बात कर सकते हैं।

बच्चे हमेशा वो करना पसंद नहीं करते हैं जो उन्हें कहा जाता है। इसलिए बच्चे को आर्डर देने के बजाए उन्हें सुझाव और ऑप्शन दें। इसके बाद भी बच्चा ना मानें तो ऐसे में धैर्य ना खोएं। अपनी बात को कई बार कह सकती हैं लेकिन गुस्‍सा ना हो, ऐसे में बच्चा जल्द ही अपनी जिद छोड़ देगा। हरदम टीवी के आगे बैठा रहता है बच्चा, तो इस तरह छुड़ाएं उसकी यह आदत।

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एक्सपर्ट्स का मानना है कि, अगर आपको अपने बच्‍चे पर गुस्‍सा आ रहा है और आप उस पर चिल्‍ला रही हैं तो ऐसा बिल्‍कुल ना करें, क्‍योंकि हो सकता है कि आपका बच्चा आपके चीखने को जुबानी लड़ाई समझने लगे। इससे बच्चा और जिद्दी हो जाएगा। कोशिश करें कि बातचीत से निष्कर्ष निकालें। आप बड़े हैं इसलिए बच्चों की तरह बर्ताव बिल्कुल ना करें। कहीं आपका बच्चा भी तो अटेंशन पाने के लिए नहीं करता अजीब हरकतें।

जब आप अपने बच्चों के साथ किसी भी चीज को लेकर जबर्दस्ती करते हैं तो वे स्वभाव से विद्रोही होते चले जाते हैं। तत्कालिक तौर पर तो कई बार जबर्दस्ती से आपको समाधान तो मिल जाता है लेकिन आगे के लिए ये खतरनाक होता चला जाता है। बच्चों से जबरन कुछ करवाने से वे वही कुछ करने लगते हैं जिनसे उन्हें मना किया जाता है। आप अपने बच्चों से कनेक्ट होने की कोशिश करें।

बच्चों के साथ उनके किसी फेवरिट काम में शरीक जरूर हों।  इससे आप उनका ‘वोट’ जीतने में कामयाब रहेंगे औऱ उन्हें अपने हिसाब से ढालने में भी।  क्योंकि, हम पर उन्हीं लोगों की बात का असर पड़ता है जो हमारे दिल के करीब होते हैं।



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