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शुभ संयोग:59 साल बाद आज विशेष संयोग में बिराजेंगे बिघ्नहर्ता, मूर्ति स्थापना को लेकर सजे पंडाल, कोरोना वायरस संक्रमण के बाद इस साल जिलेभर में गणेशोत्सव को लेकर लोगों में उत्साह

धर्म ब्रेकिंग न्यूज़ विशेष सोनीपत

प्रथम पूज्यनीय गजानन, विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा उपासना का पर्व आज से शुरू हो रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण के बाद इस साल जिलेभर में गणेशोत्सव को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। इस बार 59 साल बाद विशेष संयोग में गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। जिसमें विधि विधान से पूजा पाठ करने से साधकों को विशेष लाभ होगा। गणेशोत्सव को लेकर शहर में आयोजकों द्वारा पंडाल व मंडप बनाने का कार्य तेज कर दिया गया है। बड़ा बाजार स्थित गंज बाजार में शुक्रवार शाम को कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा विभिन्न कार्यालयों और घरों सहित मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना का कार्यक्रम किया जा रहा है।

पंडित रामकृष्ण पाठक ने बताया कि करीब 59 साल पहले भी इस तरह का संयोग बना था। गणेश चतुर्थी तिथि पर चित्रा नक्षत्र के साथ चार ग्रहों का स्वयं की राशि में थे और चंद्रमा व शुक्र ग्रह का तुला राशि में विराजमान थे। इस तरह के शुभ योग में गणेश चतुर्थी बहुत ही शुभ फल दायिनी होगी। इसके अलावा गणेश चतुर्थी तिथि पर एक और भी संयोग बनने जा रहा है। इस दिन सूर्य अपनी राशि यानी सिंह में, बुध भी अपनी राशि कन्या में, शनि का स्वयं की राशि मकर में गोचर करना और शुक्र का अपनी राशि तुला में रहना। इन चार ग्रहों का एक साथ स्वयं की राशि में रहना विशेष संयोग का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा दो बड़े ग्रह शनि और गुरु का एक साथ वक्री होना भी शुभ संयोग का संकेत है। श्री गणपति शरणम् धर्मार्थ सोसाइटी द्वारा गणपति महोत्सव एवं शोभायात्रा का कार्यक्रम किया जा रहा है।

सोसाइटी के प्रधान हरिदास पाटिल ने बताया कि गणपति महोत्सव का कार्यक्रम 10 से 18 सितंबर तक चलेगा। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में कोविड-19 के नियमों की पूरी तरह से पालना की जाएगी। पूरे महोत्सव के दौरान अलग-अलग दिनो में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिसमें सुदंर कांड पाठ से लेकर जागरण तक होंगे। उन्होंने कहा कि पांच सवा पांच फीट ऊंची गणेश जी की प्रतिमा की पूजा की जाएगी।

गणेशोत्सव किसी संजीवनी से कम नहीं

कोराेना वायरस से निराशा और भयभीत लोगों के लिए विघ्नहर्ता का गणेशोत्सव किसी संजीवनी से कम नहीं है। जिसकी वजह से धार्मिक प्रवृत्ति का हर व्यक्ति अपने स्तर पर विशेष तौर से गणेश जी की पूजा अर्चना करना चाहता है। लेकिन पंडितों की संख्या कम होने की वजह से लोगों को ब्राह्मण भी ढूंढने में समस्या हो रही है।

क्योंकि कर्मकांडी ब्राह्मणों को शेड्यूल पहले से ही फिक्स हो गया है। जिसके कारण घर, कार्यालय, संस्थान आदि में लोग गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा पाठ करना चाहते हैं। इस बार 59 साल बाद विशेष संयोग में गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा।

पूजन का शुभ मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 2 मिनट से लेकर 1 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। पूजन की कुल अवधि: 2 घंटे 29 मिनट रहेगी।

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