bajrang-ravi

आज लौटेंगे टोक्यो ओलिंपिक के सूरमा:बजरंग-रवि के जयघोष से करेंगे चैंपियनों का अभिनंदन

दिलचस्प ब्रेकिंग न्यूज़ राष्ट्रीय विशेष सोनीपत

चैंपियन के अभिनंदन के लिए सोनीपत तैयार है। टोक्यों ओलिंपिक के सूरमा अपने घर लौट रहे हैं। टोक्यों से सुबह साढ़े 11 बजे चलकर खिलाड़ी शाम सवा पांच बजे स्वदेश लौट जाएंगे। वहां एयरपोर्ट पर खिलाड़ियों का पहले फूल बरसाकर उन्हें माला पहनाकर अभिनंदन किया जाएगा। स्पेशल मिठाई बनाई जा रही है। फूल मालाओं के लिए आर्डर दिए जा चुके हैं।

ओलिंपिक रजत पदक विजेता रवि दहिया और कांस्य पदक विजेता बजरंग पुनिया के अभिनंदन के लिए करीब 51 गाड़ियों का काफिला एयरपोर्ट पहुंचेगा। वे करीब साढ़े चार बजे ही एयरपोर्ट परिसर पहुंच जाएंगे। एयरपोर्ट से बाहर आने पर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण भारत माता की जय और बजरंग और रवि के जयकारें लगाएंगे। दिल्ली से घर वापसी भी जुलूस के रूप में की जाएगी। जब पहली बार घर पहुंचेंगे तो आरती उतारी जाएगी। खास बात यह है कि दोनों ही जगह मां खीर और चुरमा बना बेटों का लाड़ करेगी।

18 अगस्त को नाहरी में होगा रवि का अभिनंदन समारोह

गांव नाहरी में रवि का अभिनंदन समारोह 18 अगस्त को आयोजित किया जाएगा। जिसमें मुख्यमंत्री मनोहर लाल मुख्य अतिथि होंगे। उनके पिता ने बताया कि सीएम ने उनका आमंत्रण स्वीकार कर लिया है। जिसकी तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

इन पलों के लिए दोनों परिवारों ने खूब किए त्याग

अपने बच्चों को ओलिंपिक मेडलिस्ट बनते हुए देखने के लिए दोनों ही परिवार ने खूब त्याग किए हैं। रवि दहिया के पिता जहां 12 साल तक सोनीपत से दिल्ली रवि को घी, दूध व मावा पहुंचाते, दो बार फसल में डेढ़ लाख से ज्यादा का नुकसान होने के बाद दूसरों से कर्ज लेकर उसकी खुराक पूरी की। कभी एक तो कभी दो महीनों तक बेटे से बात भी नहीं हो पाती थी, फिर भी कभी बेटे को शिकायत नहीं की।जबकि बजरंग के पिता जिन्होंने अपनी सुविधा छोड़कर कभी पैदल तो कभी साइकिल पर बजरंग को अखाड़े में पहुंचाया।

परिजन बोले- यही तो सपना था, बेटा पदक के साथ लौटे

यह खुशी शब्दों और भावना से परे हैं रवि के पदक जीतने की खुशी। कितने दिनों बाद उसे टीवी के बजाए हकीकत में देखूंगा मिलूंगा और गले लगाउंगा। मेरे जीवन की पहली ख्वाहिश को उसने पूरा किया है। उसकी मेहनत और मेरे त्याग के साथ इसमें शंभु दादा का आर्शिवाद रहा है, इसके लिए खास प्रसाद बनाया है जो रवि को खिलाएंगे। राकेश दहिया, पिता रवि दहिया

मैं खुद जाऊंगा बजरंग का स्वागत करने

बजरंग की कामयाबी उसके बुलंद हौंसले की कहानी कहती है,गोल्ड छूटा तो अपना हौंसला नहीं खोया बल्कि कांस्य पदक के महत्व को समझते हुए लड़ा और जीता। वे खुद ग्रामीणों के साथ मिलकर बजरंग के स्वागत के लिए जाएंगे। इसकी तैयारी कर ली गई है। इसके बाद जैसे ही वह दिल्ली से फ्री होगा उसका यहां भी जोरदार अभिनंदन किया जाएगा।
-बलवान सिंह, पिता बजरंग पुनिया

Source

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *