during the meeting the plaster of the ceiling of the room fell the teacher injured the building has been declared a conduit for 4 years

मोई माजरी गांव के राजकीय हाईस्कूल का मामला:मीटिंग के दौरान कमरे की छत का प्लास्टर गिरा, शिक्षक घायल, 4 साल से कंडम घोषित है बिल्डिंग

गन्नौर ब्रेकिंग न्यूज़ शिक्षा सोनीपत

कोरोना के डर के बाद अब स्कूलों में लौट रहे बच्चों के लिए कंडम स्कूली भवनों में भय के साए में बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। मोई माजरी गांव के राजकीय हाई स्कूल में रविवार को एसएमसी कमेटी के पुनर्गठन की बैठक में छत का मलबा नीचे गिर गया। हेडमास्टर के ऊपर भी मलबा गिरा जिससे उनको हल्की चोट आई। मलबा कम होने से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन स्कूल खुलने पर यहां बड़ा हादसा भी हो सकता है। स्कूल की बिल्डिंग साल 1968 में बनी थी। इस स्कूल में 22 के करीब कमरे हैं।

बिल्डिंग जर्जर होने पर फरवरी 2017 में कंडम घोषित किया जा चुका है। स्कूल में 15 शिक्षकों के साथ ही 130 के करीब बच्चे खौफ के साये में पढ़ाई करने को मजबूर है। जिले में 53 ऐसे स्कूल हैं जिनमें या तो कमरे, बरामदे या फिर पूरी बिल्डिंग कंडम हालत में हैं। इनमें अधिकतर के लिए लंबे समय से बजट नहीं आने से बच्चे भय के साए में पढ़ते हैं।

रविवार को मोई माजरी स्कूल में एसएमसी के पुनर्गठन को लेकर बैठक बुलाई गई। इसके शुरू होने से पहले हेडमास्टर रूम में हेडमास्टर समेत शिक्षक बैठे थे। अचानक से छत से सीमेंट प्लास्टर टूट कर हेडमास्टर दलीप कुमार के ऊपर गिर गया। गनीमत ये रही कि बड़ा हादसा होने से बाल-बाल बच गया। उनके पैरों पर गुम चोट लगी है। उन्होंने बताया कि छत का प्लास्टर गिरने के बाद खुले आंगन में बैठकर ही एसएमसी को गठन किया गया।

बरसात में टपकता है पानी, कक्षाएं लगाने की दिक्कत

बरसात के दिनों में तो स्कूल में हालात काफी खराब हो जाते है। छत से पानी टपकने के साथ ही अनहोनी घटना होने का अंदेशा बना रहता है। कोई हादसा न हो, इसके लिए बच्चों को भी खुले में बैठाकर पढ़ाया जाता है। बारिश होती है तो फिर बैठाने के लिए जगह की दिक्कत होती है और छुट्‌टी तक करने को मजबूर होना पड़ता है। स्कूल के शिक्षक बिजेंद्र कादियान ने बताया कि स्कूल की बिल्डिंग सालों पुरानी होने के चलते पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। विभाग ने स्कूल की हालत को देख करीब तीन साल पहले कंडम घोषित कर दिया था, लेकिन अभी तक नई बिल्डिंग नसीब नहीं हो सकी।

खतरे में बच्चे : सालों से बिल्डिंग की हालत ठीक नहीं

राजकीय स्कूलों में भवनों को लेकर स्थिति कई जगह खराब है। 53 स्कूल ऐसे हैं जिनमें कमरे, बरामदे या बिल्डिंग को कंडम घोषित किया जा चुका है। इनकी जगह नया निर्माण किया जाना है। तब तक विद्यार्थियों को दूसरी बिल्डिंग या नजदीकी स्कूल में शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए एसडीओ और कार्यकारी अभियंता से निरीक्षण करवाने के भी निर्देश दिए गए थे, लेकिन अभी यह अधर में है। कहीं बजट जारी नहीं हुआ है। कहीं बजट है तो निर्माण पेंटिंग है।

मलिकपुर स्कूल में भी ढह गई थी छत

27 जुलाई 2018 में मलिकपुर में बरसात के बाद स्कूल के कमरे छत ढह गई थी, तब गनीमत यह थी कि बच्चे प्रार्थना में गए हुए थे। विद्यालय में करीब 450 बच्चे शिक्षा ले रहे थे। बारिश में 12वीं कक्षा के क्लासरूम की छत गिरी थी जिसमें करीब 32 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते थे। वर्ष 2014 में बिल्डिंग कंडम घोषित की गई थी। पुरखास गांव के राजकीय स्कूल की बिल्डिंग को भी कंडम घोषित किया हुआ है, लेकिन बच्चों की कक्षाएं लगाई जा रही है।

मोई माजरी के स्कूल की बिल्डिंग घोषित है, ये उनके नॉलेज में नहीं है। रविवार को एसएमसी की बैठक होने से पहले प्रिंसिपल रूम में छत का प्लास्टर टूट गिरने की जानकारी मिली है। सोमवार को स्कूल का दौरा करके आएंगे। पुरखास के स्कूल कंडम घोषित है, इसके बजट के लिए फाइल उच्चाधिकारियों के पास गई है। -कर्मबीर सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी।

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