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हरियाणा में अब एक जिले से दूसरे जिले में नहीं जा पाएगा उर्वरक, तत्काल लागू हुई व्यवस्था

राष्ट्रीय विशेष व्यापार सोनीपत

देश की राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा प्रदेश में उर्वरक के एक जिले से दूसरे में ले जाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। उर्वरक की कालाबाजारी रोकने के लिए ऐसा किया गया है। कृषि विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमित्र मिश्र ने वीडियो कान्फ्रेंस में सभी जिलों के डीसी को इसके आदेश कर दिए हैं। उर्वरक की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ ही पुलिस को भी आदेशित किया गया है। अब जिलों के टोल नाकों से होकर उर्वरक वाले वाहनों का आवागमन नहीं होने दिया जाएगा।

उर्वरक की कालाबाजारी रोकने और प्रयोग को नियंत्रित करने के लिए शासन ने अभी से प्रयास शुरू कर दिए हैं। गेहूं की फसल के लिए उर्वरक वितरण और उपयोग की रणनीति तैयार कर ली गई है। कृषि विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमित्र मिश्र ने सभी जिलों के डीसी के साथ वीडियो कान्फ्रेंस पर वार्ता की। प्रत्येक जिले को अपने लिए आवंटित उर्वरक कोटा का ही प्रयोग करना है। देखने में आया है कि उर्वरक एक राज्य से होता हुआ अगले राज्यों तक चला जाता है। कई बार यह दूसरे प्रदेशों में पहुंच जाता है। इसके चलते उर्वरक की आवाजाही पर रोक लगाई जाती है। इसके लिए पुलिस नाकों पर विशेष रूप से चेकिंग की जाए।

डा. अनिल सहरावत (उप निदेशक कृषि, सोनीपत) का कहना है कि एसीएस सुमित्र मिश्र ने उर्वरक को एक जिले से दूसरे में ले जाने पर रोक लगा दी है। इसको तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। हमने उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक के माध्यम से पुलिस नाकों को अलर्ट कर दिया है। पुलिस के साथ ही कृषि विभाग के अधिकारी भी लगातार चेकिंग पर रहेंगे।

जितेंद्र मलिक (किसान, गांव आहुलाना) का कहना है कि उर्वरक की कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार का फैसला सही है। गेहूं व धान के सीजन में कई बार उर्वरकों की खपत बढ़ जाती है और किसान खाद का स्टाक कर लेते हैं। दुकानदार दूसरे जिलों में अपने जानकारों को उर्वरक दे देते हैं जिससे संबंधित क्षेत्र के किसानों को परेशानी होती है। अब उर्वरकों की कालाबाजारी रुकेगी और किसानों को समय पर खाद मिल सकेगा।

अनिल (किसान, गांव पूठी) ने बताया कि किसानों को अपने जिले से ही उर्वरक लेने का नियम बनाया गया है। सही मायने में इस नियम का फायदा किसानों को तब होगा जब जरूरत पड़ने पर सरकार द्वारा जिले में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध करवाए जाएं।

जितेंद्र (किसान, गांव पूठी) के अनुसारसरकार ने नियम बनाया है कि जिस जिले में खेती किसानों को वहीं से उर्वरक लेना होगा। ऐसी स्थिति में सरकार को जरूरत के हिसाब से खाद उपलब्ध करवाना चाहिए।

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