अब SIM लेना पहले जैसा आसान नहीं होगा, नए नियमों में KYC से लेकर वेरिफिकेशन तक बड़ा बदलाव

SIM Card New Rules 2026: नया SIM लेने से पहले जान लें KYC और Biometric Verification के नए नियम

नई दिल्ली: अगर आप आने वाले दिनों में नया मोबाइल नंबर लेने की सोच रहे हैं, तो आपको पहले की तुलना में ज्यादा सख्त पहचान प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेलीकॉम यूजर्स की पहचान और KYC से जुड़े नए नियम लागू किए हैं।

इन नियमों का मकसद फर्जी नाम पर जारी होने वाले SIM कार्ड, SIM से जुड़े फ्रॉड और मोबाइल नंबर के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाना है।

नए SIM के लिए पहचान की प्रक्रिया होगी ज्यादा सख्त

नए नियमों के तहत मोबाइल कनेक्शन जारी करने से पहले ग्राहक की पहचान को अधिक मजबूत तरीके से सत्यापित करना होगा। इसमें बायोमेट्रिक आधारित पहचान की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

Aadhaar वाले ग्राहकों के लिए e-KYC की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जबकि अन्य मामलों में Digital KYC प्रक्रिया के जरिए पहचान की जांच की जा सकती है। Digital KYC में ग्राहक की लाइव तस्वीर और पहचान/पते से जुड़े दस्तावेजों की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी ली जा सकती है।

आपके नाम पर कोई SIM मांगे तो मिल सकता है अलर्ट

नए नियमों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यूजर अलर्ट सिस्टम है। अगर आपके नाम पर नया SIM लेने, किसी जानकारी में बदलाव करने या कनेक्शन से जुड़ी कोई कार्रवाई की जाती है, तो आपको इसकी जानकारी दी जा सकती है।

इसका फायदा यह होगा कि अगर किसी व्यक्ति ने आपकी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके SIM लेने की कोशिश की, तो आपको समय रहते इसकी जानकारी मिल सकेगी।

सिर्फ SIM लेते समय ही नहीं, आगे भी होगी पहचान की जांच

नए नियमों में पहचान सत्यापन को केवल नया कनेक्शन लेने तक सीमित नहीं रखा गया है। कुछ परिस्थितियों में KYC से जुड़े सत्यापन की जरूरत कनेक्शन अपडेट या बंद करने की प्रक्रिया के दौरान भी पड़ सकती है।

सरकार का उद्देश्य यही है कि किसी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति सही तरीके से पहचाना जा सके और संदिग्ध कनेक्शनों का दुरुपयोग रोका जा सके।

एक बड़ा बदलाव: केंद्रीय बायोमेट्रिक डेटाबेस का प्रस्ताव हटा

इन नियमों को लेकर एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। शुरुआती प्रस्ताव में अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों के यूजर्स की बायोमेट्रिक जानकारी को एक साझा सिस्टम के जरिए मिलान करने की योजना थी।

लेकिन अंतिम नियमों में Biometric Identity Verification System (BIVS) वाला प्रस्ताव शामिल नहीं किया गया। इसके बजाय e-KYC और D-KYC आधारित व्यवस्था को रखा गया है। इससे एक अलग केंद्रीय बायोमेट्रिक डेटाबेस बनाने को लेकर उठ रही निजता संबंधी चिंताओं से भी बचा गया है।

पुराने मोबाइल यूजर्स को क्या करना होगा?

फिलहाल इसका मतलब यह नहीं है कि हर मौजूदा मोबाइल यूजर को तुरंत SIM लेकर किसी दुकान पर जाकर दोबारा KYC करानी होगी। नए नियम मुख्य रूप से यह तय करते हैं कि टेलीकॉम कंपनियां नए कनेक्शन, KYC अपडेट और दूसरी संबंधित प्रक्रियाओं में यूजर की पहचान कैसे सत्यापित करेंगी।

टेलीकॉम कंपनियों को इन बदलावों के लिए अपने सिस्टम में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने होंगे।

क्यों जरूरी हैं ये बदलाव?

आज मोबाइल नंबर सिर्फ कॉल करने का साधन नहीं है। बैंकिंग, UPI, WhatsApp, सोशल मीडिया, सरकारी सेवाओं और कई ऑनलाइन अकाउंट्स में मोबाइल नंबर पहचान और OTP का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

ऐसे में किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर SIM जारी होना या किसी के नंबर पर गलत तरीके से कब्जा होना बड़ा सुरक्षा जोखिम बन सकता है। नए KYC नियम इसी तरह के मामलों को कम करने की कोशिश हैं।

यानी आने वाले समय में SIM कार्ड खरीदने की प्रक्रिया थोड़ी ज्यादा सख्त जरूर होगी, लेकिन इसका सीधा उद्देश्य मोबाइल नंबर को उसके असली यूजर से जोड़ना और डिजिटल फ्रॉड की गुंजाइश कम करना है।

— Sonipat News Digital Desk

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